: सोनभद्र जनपद में यूपी एटीएस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के सफील सलमानी उर्फ अली रजवी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अली रजवी गैर इस्लामिक धर्मगुरुओं की हत्या की साजिश रच रहा था। सोशल मीडिया पर लगातार संदिग्ध गतिविधियों के बाद यह गिरफ्तारी हुई है।
उत्तर प्रदेश एटीएस ने सोनभद्र जिले से एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश किया है। करमा थाना क्षेत्र के भदोही गांव का रहने वाला सफील सलमानी उर्फ अली रजवी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह गैर इस्लामिक धर्मगुरुओं की टारगेट किलिंग की योजना बना रहा था।
अली रजवी की असल पहचान जितनी साधारण दिखती है साजिश उतनी ही खतरनाक। कभी शटरिंग का काम करने वाला अली अपने फेसबुक आईडी पर खुद को एक पोर्टल न्यूज का जिला रिपोर्टर लिखता था। सोशल मीडिया पर लगातार कट्टरपंथी पोस्ट डालकर यह युवाओं को बरगलाने की कोशिश कर रहा था।
अली रजवी चार भाइयों में तीसरे नंबर का है। उसका पिता मुंबई में मजदूरी करता है। एक भाई पिता के साथ मुंबई में ही रहता है दूसरा सोनभद्र नगर में और तीसरा ऑटो चलाता है। परिवार की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है, लेकिन अली के दिमाग में नफ़रत और हिंसा के बीज पल रहे थे।
एटीएस की जांच में सामने आया है कि अली रजवी व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर विदेशी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। लगातार कट्टरपंथी कंटेंट शेयर कर रहा था और हिंदू धर्मगुरुओं की हत्या की बात करता था। उसकी यही संदिग्ध गतिविधियां एटीएस की नज़र में आईं।
यह युवक सोशल मीडिया के माध्यम से संदिग्ध संगठनों से जुड़ा था। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की तैयारी कर रहा था। फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है।
अली रजवी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर छोटे-छोटे गांवों तक कट्टरपंथी सोच कैसे पहुंच रही है। सोनभद्र जैसे शांत जिले से इस तरह का नेटवर्क पकड़ा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।
तो सोनभद्र से निकली इस साजिश ने साबित कर दिया है कि आतंकी नेटवर्क अब किसी भी कोने में छिपकर सक्रिय हो सकते हैं। एटीएस की सतर्कता ने एक बड़ी साजिश को नाकाम किया है लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक मासूम युवाओं को बरगलाकर मौत का मुसाफ़िर बनाया जाता रह — वही आरोपी सफ़ील रिजवी की मां नज़बून ने बताया कि हमारे बेटे बाबू को को भोर में 04 बजे के आसपास एक सुमो से आए पुलिस वाले उठा ले गए और कुछ भी नहीं बताए कि क्यों ले जा रहे हैं। मेरा मेरे कुल चार बेटे और तीन बेटियां है मेरे पति मुझे छोड़ दिए हैं मै ही सभी की मजदूरी कर के पालन पोषण करती हूं बाबू छोटा मोटा काम करता है और छोटा बेटा ऑटो चलता है। बाबू धार्मिक किताब लेकर पढ़ा करता था, मोबाइल चलाते हमने नहीं देखा मेरा बेटा कोई गलत कार्य नहीं करता था। मामले में स्थानीय ग्रामीण मुरीद अली ने बताया कि हम सफ़िल अहमद को नहीं बाबू अली को जानता हूं ये सब कोई काम नहीं करते है केवल घूमना फिरना मां इसकी काम कर के सभी का पेट पालती है। मेरे द्वारा जो जमीन दान में दी गई है उसी पर मकान बनाकर रहते हैं।











