मिलिन्द कुमार

घोरावल सोनभद्र। घोरावल तहसील अंतर्गत इलाहाबाद बैंक की खरुआव शाखा में 2007-08 में हुए बहुचर्चित सूखा राहत अनुदान घोटाले के मुख्य आरोपी और इंडियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चंद्रेश चौधरी को 17 साल बाद आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) ने पटना (बिहार) से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर घोरावल तहसील के किसानों के लिए आई राहत राशि में करीब 41.50 लाख रुपये के गबन का आरोप है।
किसानों के हक पर डाला डाका
सूत्रों के अनुसार, 2007-08 में सूखे की वजह से किसानों को केंद्र व राज्य सरकार की ओर से अनुदान राशि दी जानी थी। यह रकम बैंक खातों के माध्यम से किसानों तक पहुँचाई जानी थी। लेकिन उस दौरान इंडियन बैंक, घोरावल शाखा में पदस्थ प्रबंधक चंद्रेश चौधरी ने मिलीभगत कर बड़ी राशि का गबन कर लिया। कई किसानों को समय से पैसा नहीं मिल पाया और राशि फर्जी खातों के जरिए निकाल ली गई।
मुकदमा दर्ज, पर आरोपी रहा फरार
घोटाले की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच कराई। आरोप प्रमाणित होने पर वर्ष 2008 में बैंक मैनेजर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में चार आरोपी पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी चंद्रेश चौधरी फरार हो गया था।
ईओडब्ल्यू की टीम की बड़ी सफलता
करीब 17 वर्षों से आरोपी की तलाश जारी थी। आर्थिक अपराध इकाई की टीम को हाल ही में सूचना मिली कि चंद्रेश चौधरी पटना में छिपकर रह रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया। आरोपी को पटना से सोनभद्र लाकर न्यायालय में पेश किया जाएगा।
किसानों में आक्रोश, न्याय की उम्मीद
इस घोटाले के चलते उस समय हजारों किसान राहत राशि से वंचित रह गए थे। किसानों का कहना है कि ऐसे घोटालों की वजह से गरीब और जरूरतमंद को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ नहीं मिल पाता। अब आरोपी की गिरफ्तारी से किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है।










