सोनभद्र जनपद के ओबरा कोतवाली क्षेत्र का है जहां ओबरा नगर पंचायत भलुआ टोला, पानी टंकी के पास स्थित डीह बाबा मंदिर के समीप यहां जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर निर्माण कार्य शुरू किए जाने का विरोध स्थानीय आदिवासियों ने किया।
आदिवासी समुदाय का कहना है कि यह भूमि डीह बाबा की परंपरागत पूजा स्थल की है, जहां वे वर्षों से पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि इस जमीन पर उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा भी आवंटित किया गया है, बावजूद इसके कब्जे का प्रयास किया गया, जिसका उन्होंने विरोध किया।वहीं दूसरे पक्ष, समुदाय विशेष का कहना है कि उनकी बेटी निर्धन है, जिसकी शादी ओबरा में हुई थी और उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ था। उसी स्वीकृति के आधार पर मकान निर्माण कराया जा रहा था, जिसे आदिवासियों के विरोध के चलते रुकवा दिया गया।विवाद बढ़ने की सूचना मिलते ही डायल 112 के माध्यम से पुलिस को अवगत कराया गया। मौके पर पहुंचीं ओबरा करमा चौकी इंचार्ज विष्णु प्रभा सिंह ने पुलिस बल के साथ हालात को संभाला और दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली लाया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शांति भंग और बलवा की धाराओं में करीब एक दर्जन से अधिक लोगों का चालान किया है।इधर मामले की जानकारी मिलते ही हिंदूवादी संगठनों और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता भी ओबरा कोतवाली पहुंच गए, जिससे माहौल और संवेदनशील हो गया।
राजस्व विभाग का कहना है कि विवादित भूमि आबादी के नाम पर दर्ज है, फिलहाल वहां किसी का वैध कब्जा नहीं है और जांच के बाद ही विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना जांच किसी को भी कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं।दुद्धी के बाद ओबरा में सामने आया यह मामला एक बार फिर जनपद में जमीन विवाद और अवैध कब्जों को लेकर बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रहा है।











