रामप्रवेश गुप्ता

बीजपुर (सोनभद्र) पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पेशे पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बीजपुर थाना क्षेत्र में इन दिनों एक तथाकथित पत्रकार की गतिविधियां चर्चा और संदेह के घेरे में हैं, जिस पर आरोप है कि वह पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली और शराब तस्करी जैसे संगीन अपराधों में लिप्त है। क्षेत्र में फैल रही चर्चाओं और स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह व्यक्ति न सिर्फ पत्रकारिता की गरिमा को तार-तार कर रहा है, बल्कि अवैध कारोबार का एक संगठित नेटवर्क भी संचालित कर रहा है।
बताया जा रहा है कि यूपी के बीजपुर से मध्य प्रदेश के बैढ़न तक अंग्रेजी शराब की धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है। इस पूरे खेल में एक रसूखदार शराब कारोबारी और उक्त तथाकथित पत्रकार की मिलीभगत सामने आ रही है। चूंकि मध्य प्रदेश में शराब की कीमत उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक है, इसी अंतर का फायदा उठाकर यह गिरोह बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी को अंजाम दे रहा है।
‘कलम’ से ‘काले कारोबार’ तक का सफर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह तथाकथित पत्रकार अब खबरों से ज्यादा ‘वसूली’ और ‘सप्लाई’ के खेल में सक्रिय हो चुका है। पत्रकारिता के नाम पर दबाव बनाना, सौदेबाजी करना और फिर उसी प्रभाव का इस्तेमाल अवैध कारोबार को संरक्षण देने में करना इसकी पहचान बन चुकी है। आरोप तो यहां तक हैं कि इसने कुछ स्थानीय युवाओं को लालच देकर अपने गिरोह में शामिल कर लिया है, जो रात के अंधेरे में लग्जरी वाहनों के जरिए शराब की खेप यूपी से छत्तीसगढ़ और एमपी तक पहुंचाते हैं।
रात के अंधेरे में दौड़ती गाड़ियां, प्रशासन मौन?
सूत्र बताते हैं कि यह पूरा खेल रात के समय संचालित होता है, जब तेज रफ्तार लग्जरी गाड़ियां सीमाओं को पार करती हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद संबंधित महकमा पूरी तरह अनजान या यूं कहें कि बेखबर नजर आ रहा है। इससे प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
क्षेत्रीय नागरिकों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों की वजह से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे की साख भी गिर रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह पत्रकारिता की आड़ में अपराध करने की हिम्मत न जुटा सके।
प्रशासन के लिए चुनौती
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या इस ‘कलम के दलाल’ के नेटवर्क का पर्दाफाश होगा, या फिर यह काला खेल यूं ही चलता रहेगा? फिलहाल बीजपुर से बैढ़न तक फैले इस अवैध कारोबार ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब देना अब प्रशासन के लिए बेहद जरूरी हो गया है।









