रामप्रवेश गुप्ता

कटकर समतल हो गए पहाड़, मिट्टी माफिया बेलगाम, महकमा गहरी नींद में
बीजपुर (सोनभद्र): जरहा वन रेंज अंतर्गत डोडहर ग्राम पंचायत के खैरी, मोखना, सिरसोती के टोला अधौरा सहित सिरसोती वन बैरियर के आसपास बीते कुछ वर्षों में पर्यावरण के साथ ऐसा खुला खिलवाड़ हुआ है कि कभी ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से आच्छादित यह इलाका आज समतल मैदान में तब्दील हो गया है। मिट्टी माफियाओं ने भारी मशीनों के सहारे पहाड़ों को बेरहमी से काट डाला और हजारों पेड़-पौधों को नेस्तनाबूद कर दिया, जबकि जिम्मेदार महकमे मूकदर्शक बने रहे।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जिस क्षेत्र में कभी विशाल पहाड़ और घना जंगल हुआ करता था, वहां आज केवल मिट्टी के गड्ढे और समतल जमीन शेष रह गई है। आरोप है कि मिट्टी कटान के दौरान पहाड़ों पर मौजूद हजारों की संख्या में पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया, जिससे वन्य जीवों का आशियाना उजड़ गया और वे पलायन को मजबूर हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध मिट्टी खनन की सूचना समय-समय पर वन विभाग को दी गई, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित भूमि एनटीपीसी की है। इसी आड़ में मिट्टी माफियाओं को खुला संरक्षण मिलता रहा। रात के अंधेरे में सैकड़ों डंफरों के जरिए मिट्टी का अवैध परिवहन किया गया और प्रशासन बेखबर बना रहा।
ताजा मामला बीते करीब दो महीनों का बताया जा रहा है, जब खैरी स्थित एक ऊँचे पहाड़ को पूरी तरह काट दिया गया। इस दौरान सैकड़ों पेड़-पौधे नष्ट कर मिट्टी उठा ली गई, लेकिन वन विभाग ने आंख मूंदे रखी।
ग्रामीणों द्वारा उच्चाधिकारियों को शिकायत किए जाने के बाद ही विभाग हरकत में आया और आनन-फानन में तीन लोगों पर कार्यवाही कर कागजी कोरम पूरा कर लिया गया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि यह भूमि वास्तव में एनटीपीसी की थी, तो फिर अब कार्यवाही की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि समय रहते विभाग सख्त कदम उठाता, तो न पहाड़ उजड़ते, न जंगल साफ होते और न ही वन्य जीवों को पलायन करना पड़ता।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई दिखावटी है और असली गुनहगारों तक पहुंचने के बजाय छोटे लोगों को निशाना बनाकर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग पर्यावरणीय विनाश की इस गंभीर घटना पर वास्तविक कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।










