खेवंधा संपर्क मार्ग टापू बना भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला – आईजीआरएस पर फर्जी जवाब, जनता के साथ खुला विश्वासघात
सोनभद्र, उत्तर प्रदेश –
सिस्टम के गठजोड़ ने एक बार फिर जनहित पर कुठाराघात किया है। खेवंधा संपर्क मार्ग (टापू क्षेत्र) वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा था, जिसकी सुध लेने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे भ्रष्टाचार का चारागाह बना डाला।
स्थानीय नागरिक आदिवासी सुनील त्रिपाठी ने जब लगातार शिकायतें कीं, आईजीआरएस पोर्टल पर मामला दर्ज किया, और तहसील दिवस पर जिलाधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपा, तब उम्मीद जगी थी कि प्रशासन अब जागेगा। लेकिन अफ़सोस, प्रशासन ने जनता की आवाज़ का गला घोंटते हुए कागज़ों पर झूठ की इमारत खड़ी कर दी — “कार्य पूर्ण हो गया” जैसे फर्जी और गुमराह करने वाले उत्तर दे दिए गए।
लेकिन सच्चाई ये थी कि सड़क आज भी गड्ढों में दबी कराह रही थी, और अधिकारी “कार्य पूर्ण” का प्रमाणपत्र बाँट रहे थे।
हाल ही में जब लखनऊ से आए उच्चाधिकारियों का दौरा हुआ और उनके साथ सोनभद्र जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी टापू पहुँचे, तब स्थानीय सुनील त्रिपाठी मौके पर भ्रष्टाचार की काली परतें खोलीं — और तब जाकर “सड़क का वास्तविक शुभारंभ” हुआ।
अब सवाल उठता है —
यदि कार्य पहले ही पूर्ण था, तो अब किस योजना या टेंडर से दोबारा निर्माण शुरू हुआ?
क्या जनता के टैक्स का पैसा दूसरी बार भी उसी जेब में जाएगा?
यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित सरकारी लूट है — जिसमें अधिकारी, और तंत्र के कुछ लोग जनता को जानबूझकर गुमराह कर रहे हैं।
जनता अब कह रही है:
“ये वो सफेदपोश हैं जो दोनों हाथों से लूटते हैं, और जब पकड़े जाते हैं तो एक हाथ का बहाना बना लेते हैं।”
“इनकी जवाबदेही अब कागज़ों से नहीं, सड़क की धूल से तौली जाएगी।”
मांग की जाती है कि—
आईजीआरएस पर गलत रिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
संबंधित विभागीय अफसरों की संपत्ति की जांच हो।
भविष्य में ऐसे कार्यों पर जन भागीदारी के साथ लाइव मॉनिटरिंग हो।
यह मामला अब सिर्फ एक टूटी सड़क का नहीं, बल्कि उस टूटी व्यवस्था का है जो जनता को रौंदकर, झूठ बोलकर, और लूट को योजनाबद्ध तरीके से वैध बना चुकी है — और यदि अब भी जनता नहीं बोली, तो हर गांव, हर मोहल्ला भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन जाएगा।











