बीजपुर रामप्रवेश गुप्ता (सोनभद्र) एक ओर एनटीपीसी रिहंद द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में राख निस्तारण के नाम पर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विरोधाभास समझ से परे है कि एक तरफ पर्यावरण संरक्षण का दिखावा किया जा रहा है और दूसरी तरफ आबादी से सटे क्षेत्रों में फ्लाई ऐश डालकर लोगों की जिंदगी में जहर घोला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र की प्राकृतिक पहाड़ियों और हरित वनों को राख निस्तारण के लिए बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया है। आरोप है कि मुनाफे की होड़ में ठेकेदारों ने वर्षों पुराने पेड़ों को कटवा दिया तथा पहाड़ियों का स्वरूप ही बदल दिया। सिरसोती गांव के महुआबारी क्षेत्र में अवैध खनन कर गहरे गड्ढे बनाए गए और बाद में उन्हें फ्लाई ऐश से भरा जाने लगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि महुआबारी डंपिंग स्थल शांतिनगर जैसी घनी आबादी वाली बस्ती के समीप स्थित है। ऐसे में गर्मी और तेज हवाओं के दौरान राख के सूक्ष्म कण उड़कर घरों तक पहुंच सकते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान चला रही है, तब क्षेत्र की प्राकृतिक पहाड़ियों और हरित संपदा को नष्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
उनका कहना है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना तभी सार्थक होगा, जब धरातल पर भी पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। एक ओर पर्यावरण बचाने की बातें की जा रही हैं, जबकि दूसरी ओर बस्तियों के समीप फ्लाई ऐश डंप कर पर्यावरण को प्रदूषित किया जा रहा है और रहवासियों की जिंदगी को खतरे में डाला जा रहा है।
मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने जिलाधिकारी सोनभद्र से तत्काल जांच कराकर अवैध कटान, खनन और राख डंपिंग की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।











