रामप्रवेश गुप्ता

ग्रामीणों का आरोप- अधूरे कार्य पर जारी हुए पूर्णता प्रमाण-पत्र, जांच की उठी मांग ।।
बीजपुर (सोनभद्र) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना सोनभद्र के झीलों, खम्हरिया व बीजपुर क्षेत्र में सवालों के घेरे में नजर आ रही है। भीषण गर्मी के बीच जहां कई गांवों में कुएं सूख चुके हैं और हैंडपंप जवाब देने लगे हैं, वहीं कई गांवों में अब तक नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची है। इसके बावजूद कार्यदायी संस्था पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से पूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रमाण-पत्र (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) जारी कराने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से करोड़ों रुपये की लागत से संचालित जल जीवन मिशन परियोजना का लाभ अधिकांश ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सका है। आरोप है कि कई गांवों में अब तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी पूरा नहीं हुआ, जबकि कागजों में योजनाओं को पूर्ण दर्शा दिया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार नेमना, झीलों, सिरसोती, करमघट्टी, पिपरहार, डुमरहर, जिगनहवा, लीलाडेवा, अरझट, जरहा, रजमिलान, महुली, बीजपुर और डोडहर समेत दर्जनों से अधिक गांवों में पाइपलाइन कार्य अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर खुदाई होने के बावजूद पाइपलाइन नहीं पहुंची, जबकि कुछ गांवों में सीमित क्षेत्रों को छोड़कर जलापूर्ति शुरू नहीं हुई।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि परियोजना में कथित रूप से बिचौलियों, ठेकेदारों और कुछ प्रभावशाली लोगों की सांठगांठ के कारण अनियमितताएं बढ़ी हैं। आरोप है कि निजी वाहनों और मशीनों को किराये पर लगाकर भी लाभ कमाया जा रहा है।
कुछ ग्राम प्रधानों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कार्यदायी संस्था के दबाव में प्रमाण-पत्र जारी करने की स्थिति बनी, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस मामले में जीएम, जीपीबीआर प्रह्लाद प्रसाद ने कहा कि जिन मजरों और टोलों में पाइपलाइन योजना नहीं पहुंच सकी है, वहां सोलर सिस्टम आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की योजना है।
वहीं एडीएम नमामि गंगे, सोनभद्र रोहित यादव ने कहा कि यदि किसी गांव या मजरे में योजना का लाभ नहीं पहुंचा है तो जांच कराकर कार्य पूरा कराया जाएगा। साथ ही गलत तरीके से जारी किए गए प्रमाण-पत्रों की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भीषण गर्मी में पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कागजों में पूर्ण दिख रही योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन पर कब पहुंचेगा? जल जीवन मिशन की सफलता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बहस तेज कर दी है।









