
बीजपुर (सोनभद्र) एनटीपीसी रिहंद परियोजना में श्रमिकों और कर्मचारियों के बीच कथित भेदभाव को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। वेतन, अवकाश और बोनस जैसे मुद्दों पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब रिटायरमेंट नीति को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर श्रमिकों और सामाजिक संगठनों ने परियोजना प्रबंधन पर “दोहरी नीति” अपनाने का आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्यतः सरकारी गाइडलाइन में किसी भी संस्थान में कार्यरत कर्मचारी या श्रमिक की अधिकतम सेवा आयु 60 वर्ष निर्धारित की गई है। इस आयु के पश्चात सेवा समाप्त कर दी जाती है। आरोप है कि एनटीपीसी रिहंद परियोजना में यह नियम समान रूप से लागू नहीं हो रहा है। जहां एक ओर मजदूरों को 60 वर्ष की आयु पूरी करते ही सेवा से अलग कर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ चयनित या “प्रबंधन के करीबी” माने जाने वाले कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी पुनः कार्य पर रखा जा रहा है।
श्रमिकों का कहना है कि वर्षों तक परियोजना में अपना श्रम, समय और ऊर्जा देने के बावजूद उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद किसी प्रकार का अवसर नहीं दिया जाता, जबकि कुछ कर्मियों को कम वेतन पर ही सही, दोबारा नियुक्ति मिल जाती है। इससे न केवल श्रमिकों में असंतोष की भावना पनप रही है, बल्कि वे स्वयं को उपेक्षित और हीन भावना से ग्रसित महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी तर्क है कि यदि कार्यकुशलता और अनुभव ही मापदंड है, तो यह बात मजदूरों पर भी समान रूप से लागू होती है। कई मजदूर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में वर्षों का अनुभव रखते हैं और परियोजना के संचालन में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में उनके साथ अलग व्यवहार किया जाना न्यायसंगत नहीं माना जा रहा।
आरोप यह भी है कि सेवानिवृत्ति के बाद कुछ कर्मियों की पुनर्नियुक्ति से जहां एक ओर युवा और योग्य अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय जानकारों ने इसे संभावित रूप से “भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला” कदम भी बताया है।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों और श्रमिकों ने एकजुट होकर एनटीपीसी के उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने मांग की है कि एक ही संस्थान में कार्यरत सभी वर्गों के लिए नियम समान रूप से लागू किए जाएं और किसी भी प्रकार के भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाए।
यदि समय रहते इस पर निष्पक्ष और पारदर्शी निर्णय नहीं लिया गया तो बढ़ते असंतोष के बीच यह मुद्दा आने वाले समय मे और गंभीर रूप ले सकता है ।







