सोनभद्र। शहीद स्थल करारी, दयानंद साहित्यिक संस्थान, साहित्य दीप संस्थान तथा सोन संगीत फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वृहद काव्य संध्या का आयोजन सोनभद्र बार एशोसिएशन सभागार में मंगलवार को महान गणितज्ञ आर्यभट्ट व बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर अब्दुल हई, सोनभद्र बार एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक प्रसाद श्रीवास्तव एड व महामंत्री योगेश दिवेदी एड ने शारदे के चित्र व आर्यभट तथा अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। तदुपरांत गायक सुशील मिश्रा के सस्वर वंदना माई शारदे आ ज्योतिआ जरावा, अन्हरिया भगावा हो से आयोजन का आरंभ हुआ।
संचालन करते हुए अशोक तिवारी एडवोकेट ने बूढ़ा शहर आंधियों की जद में आ गया सुनाकर वाहवाही बटोरी। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने, चली हूँ मिटाने बुराई के तम को, मोहब्बत का दीपक जलाने चली हूँ सुनाकर महफ़िल लूट लिया। धर्मेश चौहान एड ने जहाँ भी देखो जंग छिड़ी है जीना है दुश्वार रचना पढ़ कर तालियां बजवाते रहे।
प्रदुम्न कुमार त्रिपाठी एडवोकेट ने, सच्चे को होती जेल तुम्हारी ऐसी तैसी, नफरत बहशत की रेल तुम्हारी ऐसी तैसी सुनाकर आईना दिखाया। गीतकार दिवाकर दिवेदी मेघ ने आदमी अब आज कितना रह गया है आदमी,आदमी के पास से अब जा रहा है आदमी सुनाकर वाहवाही लूटी। दिलीप सिंह दीपक ने तुम सब कुछ बेच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो, सुनील चौचक ने, लगलि अगिलही जातिवाद के हालति बाटै खस्ता, मूस बनल बा मनई देखा खून भयल बा सस्ता, दयानंद दयालू ने पर्यावरण संरक्षण पर रचना, उजड़ल जाता बाग बगैचा लागै सूना सूना।
अब्दुल हई ने अध्यक्षता करते हुए गंभीर शायरी रो के बुलबुल ने कहा कैद से रिहा न करो, गुलसिताँ पर अभी सैयाद के पहले होंगे सुनाकर माहौल दिया। विवेक चतुर्वेदी ने मेरे अंदर अदाकारी नहीं आई। सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम ने सिंहवाहिनी जयति जै जै मातु भारत भारती, सुनाकर वाहवाही लूटी। मदन चौबे एडवोकेट ने भारत में परिवारिक दल बदरंग दिखाई देता है सुनाकर गतिज उर्जा दिये। ऋषभ त्रिपाठी व विशेष अस्थाना ने भी काव्यपाठ किया।सभी कवियों का सारस्वत अभिनंदन किया गया। आभार शहीद स्थल करारी निदेशक प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने व्यक्त किया। बार अध्यक्ष व महामंत्री व वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविन्द मिश्रा एडवोकेट ने वृहद वक्तव्य गणितज्ञ आर्यभट्ट व अंबेडकर के योगदान से लोगों को जानकारी से जोड़ा।
इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी एडवोकेट, अनीशा चौहान, हर्ष चौहान फारुक अली हाशमी, देवानंद पांडेय एडवोकेट, संदीप कुमार शुक्ल एडवोकेट, गोपाल बंगाली समेत कई लोग वीर रस श्रृंगार ओज छंद गीत गजल लोकगीत का आनंद लेते रहे।











