
सोनभद्र। गुरुवार को देश व्यापी हड़ताल को समर्थन देते हुए संयुक्त वाम दल के कार्यकर्ताओं ने सोनभद्र में जूलूस निकालकर कर कलेक्ट्रेट पर किया जोरदार धरना प्रदर्शन। जहां वक्ताओं ने कहा कि देश व राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार की श्रमिकों, किसानों, खेत मजदूरों , आदिवासियों , नौजवानों, महिलाओं , दस्तकारों, दुकानदारों, व्यापारियों, छोटे उद्योगों, छात्रों और स्कीम वर्करों एवं मध्यम वर्ग विरोधी नीतियों के विरुद्ध दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों, संयुक्त किसान मोर्चा, संयुक्त खेत मजदूर यूनियन एवं संयुक्त वाम दलों द्वारा 12 फरवरी 2026 को राष्ट्र व्यापी आम हड़ताल के आवाहन पर जनपद सोनभद्र की जिला कमेटियां इस हड़ताल का पुरजोर तरीके से समर्थन करते हुए और केंद्र व राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करती है और आज हम
निम्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रमुख मांगों को लेकर राष्ट्रपति महोदया के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया ….
जिसमें प्रमुख रूप से यह मांगें रहीं।
दमनकारी 4 श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए और पूराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।
सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
बिजली संसोधन विधेयक 2025 वापस लिया जाए और उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर थोपना निरस्त किया जाए। तथा किसानों,खेतीहरों और गरीबों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दिया जाए।
ग्रामीणों व खेत मजदूरों के हित में वीबी जी रामजी योजना को निरस्त कर पूराने मनरेगा योजना को बहाल किया जाए।
मनरेगा मजदूरों को 200 दिन के काम की गारंटी और उन्हें प्रतिदिन की रुपए 600 की न्यूनतम मजदूरी दिया जाना सुनिश्चित किया जाए।
किसानों के लिए एम.एस.पी. की कानूनी गारंटी सुनिश्चित किया जाए।
मजदूरों, किसानों और आम जनता के जीवन और जीविका पर हमला बन्द किया जाए देश में बढ़ती मंहगाई पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाया जाए।
पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल किया जाए और सभी स्कीम वर्करों व असंगठित मजदूरों को न्यूनतम वेतन रु० 26000 देना लागू किया जाए।
बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग सहित केंद्र और राज्यों के सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ कराया जाए।
ठेका प्रथा को बंद किया जाए और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के सभी पुराने कानूनों को बहाल कराया जाए।
देश की संप्रभुता को अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने गिरवी रखने वाली, किसानों को बर्बाद करने वाले मुक्त व्यापार समझौते तथा यूरोपीय संघ के साथ हुऐ व्यापार समझौते को निरस्त किया जाए।
किसानों व खेत मजदूरों को 55 वर्ष की आयु के बाद न्यूनतम रुपए 10000 प्रति माह पेंशन दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र के विभिन्न क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा गरीबों, आदिवासियों व भूमिहीनों पर किए जा रहे शोषण उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाया जाए और वनाधिकार कानून का पारदर्शिता से पालन करते हुए लोगों को इसका अधिक से अधिक लाभ दिलाया जाए।
अधिक राजस्व देने के साथ सबसे अधिक बिजली उत्पादन वाले व आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में बिजली कटौती मुक्त किया जाए और यहां के नौजवानों को रोजगार के लिए स्थानीय सभी कल कारखानों में योग्यता के हिसाब से रोजगार की गारंटी ( नौकरी में स्थानीय सुरक्षित वरियता ) सुनिश्चित कराया जाए।
चार प्रांतों की सीमा को समेटे विंध्य कैमूर पर्वतमालाओं के मध्य स्थित जनपद सोनभद्र में उच्च शिक्षा के लिए “कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय” व लोगों को बेहतर चिकित्सा के लिए “एम्स” जैसे संस्थान की स्थापना कराई जाए।
जनपद सोनभद्र में कनेक्टिविटी और विकास की गति को तेज करने के लिए यहां विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली सभी सड़कों को दुरुस्त कराया जाए और विभिन्न क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के टावर स्थापित कराया जाए।
जनपद सोनभद्र के बालू/ मोरम व पत्थर खनन क्षेत्रों में अवैध तरीके से चल रहे जेसीबी/ पोकलेन जैसी मशीनों पर तत्काल रोक लगाई जाए और मजदूरों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए तथा उन्हें सुरक्षा, चिकित्सा, बीमा के साथ श्रम कानून का पूरा लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
जनपद में वर्षों से स्थापित रिंहद, धंधरौल व नगवां बांध के हजारों विस्थापितों को आज तक विस्थापन का दंश झेलना पड़ रहा है जिन्हें आज तक विस्थापन नीति का समुचित लाभ नहीं प्राप्त हो सका है ,उन्हें तत्काल प्रभाव से विस्थापन नीति का पूरा लाभ दिलाया जाए।
इस धरना प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, माकपा जिला सचिव कामरेड नंद लाल आर्य, माले जिला सचिव कामरेड सुरेश कोल ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान
भाकपा,माकपा , माले ,
उत्तर प्रदेश किसान सभा ,
अखिल भारतीय किसान सभा ,
उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन , अखिल भारतीय ग्रामीण मजदूर सभा के सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।










