कन्हौरा प्रधान रमेश मौर्य हत्याकांड में एएसजे प्रथम सोनभद्र का बड़ा निर्णय, मुख्य आरोपी राजनारायण गिरि की सुनवाई के दौरान हो चुकी थी मौत
सोनभद्र के चर्चित कन्हौरा ग्राम प्रधान हत्याकांड में करीब नौ वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सोनभद्र की अदालत ने ग्राम प्रधान रमेश मौर्य की हत्या के मामले में रविन्द्र चौधरी, संतोष चौधरी और जितेन्द्र यादव को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं दोषी जितेन्द्र यादव को 3/25 आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। वहीं मामले में नामजद आरोपी श्याम चरण गिरि उर्फ बबलू गिरि, रामधारी चौधरी और सत्येन्द्र चौधरी को न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जबकि मुकदमे के मुख्य आरोपी राजनारायण गिरि की विचारण के दौरान मृत्यु हो जाने पर उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त हो गई थी।
अभियोजन के अनुसार चार जून 2017 की शाम कन्हौरा ग्राम पंचायत के प्रधान रमेश मौर्य अपने घर पर मौजूद थे। इसी दौरान कुछ लोग दवा लेने के बहाने उनके घर पहुंचे। रमेश मौर्य जैसे ही घर से बाहर निकलकर अपने छोटे क्लीनिक की ओर बढ़े, तभी बेहद करीब से उनकी पीठ में गोली मार दी गई। गोली लगते ही वह मौके पर गिर पड़े जबकि हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मृतक के पिता रामसुंदर मौर्य की तहरीर पर थाना चोपन में हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस विवेचना में ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश और पुराने विवाद को हत्या की वजह बताया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह अदालत में पेश किए। मृतक की पत्नी हेमलता समेत अन्य गवाहों ने अदालत में घटना से जुड़ी परिस्थितियों, आरोपियों की मौजूदगी और पुराने विवादों को लेकर बयान दिए। वहीं बचाव पक्ष ने गवाहों के दावों को विरोधाभासी बताते हुए अभियुक्तों को झूठा फंसाने का आरोप लगाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई कि रमेश मौर्य की मौत बेहद करीब से मारी गई गोली के कारण हुई थी। गोली शरीर के भीतर फेफड़े और हृदय को क्षतिग्रस्त करते हुए निकली, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा और खोखा कारतूस भी बरामद किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल साक्ष्य, विवेचना में जुटाए गए दस्तावेजों और पत्रावली का विस्तृत अवलोकन किया। इसके बाद न्यायालय ने रविन्द्र चौधरी, संतोष चौधरी और जितेन्द्र यादव को दोष सिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए जाने पर श्याम चरण गिरि उर्फ बबलू गिरि, रामधारी चौधरी और सत्येन्द्र चौधरी को बरी कर दिया।






