
(संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष में दोषी अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों पर दंडात्मक कारवाई की मांग की)
सोनभद्र। आज रविवार को राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबरों पर जिस प्रकार बिना समुचित पूर्व सूचना, बिना वैकल्पिक व्यवस्था तथा बिना मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखे बुलडोजर चलाया गया एवं विरोध कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया गया इसका संज्ञान लेते हुए संयुक्त अधिवक्ता महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यह करवाई अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है। न्यायालय परिसर में वर्षों से कार्यरत अधिवक्ताओं के चैंबर केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं होते, बल्कि अधिवक्ताओं की आजीविका, मेहनत, विधिक दस्तावेजों एवं मुवक्किलों के विश्वास का केंद्र होते हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा अचानक बुलडोजर कार्रवाई कर चैंबरों को ध्वस्त करना अधिवक्ता समाज का अपमान है।
श्री मिश्र ने कहा कि मैं इस घटना की घोर भर्त्सना करता हूँ तथा माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग करता हूँ कि जिन अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़े गए हैं, उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा एवं वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
लाठीचार्ज एवं बल प्रयोग के दोषी पुलिसकर्मियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए तथा
भविष्य में अधिवक्ताओं के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक/प्रशासनिक जांच कराई जाए।
लोकतंत्र में संवाद और संवेदनशीलता प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होती है, न कि दमनात्मक कार्रवाई। अधिवक्ता समाज अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव एकजुट रहेगा। प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने कहा कि यदि जल्द से जल्द दोषी अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कारवाई नहीं की गई तो पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं को एकजुट होकर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी समस्त जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।










