रामप्रवेश गुप्ता

बीजपुर (सोनभद्र) देश की प्रतिष्ठित ऊर्जा कंपनी एनटीपीसी की रिहंद परियोजना में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर कार्य कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। करोड़ों के प्रोजेक्ट और सख्त नियमों के दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। परियोजना में कार्यरत दर्जनों निजी कंपनियों के मजदूरों की सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार प्रबंधन आंखें मूंदे बैठा है।
सूत्रों के अनुसार, परियोजना में काम करने वाले मजदूरों को रोजाना कैंपर और पिकअप वाहनों में इस तरह ठूंस-ठूंस कर लाया-ले जाया जा रहा है, मानो वे इंसान नहीं बल्कि कोई सामान हों। इन वाहनों में न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही किसी प्रकार की निगरानी दिखाई दे रही है। मजदूरों को “भूसे की तरह” भरकर परियोजना गेट तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी और जिम्मेदार संस्था एनटीपीसी में इस तरह की लापरवाही कैसे हो सकती है? क्या प्रबंधन को इन अवैध और खतरनाक परिवहन तरीकों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? यदि किसी दिन इन वाहनों के साथ कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना में कार्यरत अधिकांश मजदूर बाहरी राज्यों से आते हैं, जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए यहां मजदूरी करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, जब इन मजदूरों के साथ कोई हादसा होता है, तो न तो कंपनी आगे आती है और न ही ठेकेदार। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार अकेले ही संघर्ष करने को मजबूर हो जाते हैं।
पूर्व में भी कई हादसों के उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां मजदूरों को उचित मुआवजा और न्याय नहीं मिल पाया। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं होना, प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मुद्दे पर एनटीपीसी प्रबंधन और संबंधित प्रशासन क्या कदम उठाते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा। मजदूरों की जान के साथ हो रहा यह खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा, यह एक बड़ा प्रश्न बन चुका है।।










