रामप्रवेश गुप्ता

बीजपुर (सोनभद्र) एनटीपीसी रिहंद परियोजना से निकलने वाली राख का कहर अब विस्थापितों और आसपास के ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। सिरसोती से पुनर्वास बाईपास मार्ग पर दिन-रात दौड़ती राख से लदी भारी गाड़ियों ने पूरे इलाके को जहरीले गुबार में झोंक दिया है, जिससे लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ढंके और तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों से उड़ती राख सीधे घरों, आंगनों और खाने-पीने की वस्तुओं पर जम रही है। हर सुबह लोगों को राख की मोटी परत साफ करने से दिन की शुरुआत करनी पड़ती है। इस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जहां खांसी, दमा और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
विडंबना यह है कि जिनकी जमीन पर यह परियोजना खड़ी हुई, आज वही विस्थापित अपने ही क्षेत्र में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एनटीपीसी अपने परिसर को तो साफ रखती है, लेकिन पुनर्वास बस्तियों की हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है पीड़ित ग्रामीणों ने कहा कि कुछ दिन एनटीपीसी अपने परिसर से राख परिवहन करवाये तभी उसे हमारे दुख का एहसास होगा ।
पुनर्वास के लिए बना बाईपास मार्ग अब भारी वाहनों का ‘राख कॉरिडोर’ बन चुका है। जर्जर सड़क और लगातार बढ़ते हादसों का खतरा लोगों की चिंता को और बढ़ा रहा है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन से मांग की है कि राख परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया जाए, वाहनों को ढंककर चलाया जाए और नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। चेतावनी देते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य










