सोनभद्र में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक तरफ जहां 304 जोड़ों ने एक ही मंडप में सात फेरे लेकर नई जिंदगी की शुरुआत की, वहीं दूसरी तरफ इस भव्य आयोजन के बीच एक ऐसा पहलू भी सामने आया, जिसने पूरे कार्यक्रम पर सवाल खड़े कर दिए।राबर्ट्सगंज के उर्मौरा स्थित डायट परिसर में हुए इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में परंपराओं के साथ विवाह संपन्न कराए गए, सरकारी सहायता और गृहस्थी का सामान देकर नई शुरुआत की उम्मीदें भी जगाई गईं लेकिन इसी बीच एक रोचक और संवेदनशील मोड़ पर कहानी बदलती नजर आई।मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लेकर अब आरोप सामने आ रहे हैं कि कई पात्र लाभार्थियों को आखिरी समय में योजना से बाहर कर दिया गया।यानि जहां एक तरफ शहनाइयां गूंज रही थीं, वहीं दूसरी तरफ कुछ घरों में सन्नाटा पसर गया।

सामूहिक विवाह के इस भव्य मंच पर 302 हिंदू और 2 मुस्लिम जोड़ों का विवाह पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया।वैदिक मंत्रों और पारंपरिक रस्मों के बीच जोड़ों ने सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया।मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने आशीर्वाद दिया, तो वहीं कार्यक्रम के दौरान सपा सांसद छोटेलाल खरवार का पारंपरिक गीतों को गाने का अंदाज लोगों को खूब भाया लोकगीतों की गूंज ने माहौल को जीवंत कर दिया।लेकिन इसी भव्य आयोजन के बीच मारकुंडी ग्राम पंचायत से एक शिकायत ने कहानी का दूसरा पहलू उजागर कर दिया।ग्राम प्रधान उदयम सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि गांव के कई गरीब परिवारों के युवक-युवतियों का ऑनलाइन आवेदन कर चयन भी हो चुका था, लेकिन शादी की तारीख तय होने के बाद अचानक उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया।तस्वीर में दिख रही यह युवती…जो अपने विवाह के सपने सजा चुकी थी आज इसी कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाली थी…लेकिन “लक्ष्य पूरा हो गया” कहकर उसके सपनों को रोक दिया गया।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर जब कार्यक्रम में मौजूद मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की कोई जानकारी अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आई है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कहीं भी किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन पात्र जोड़ों को इस बार अवसर नहीं मिल सका, उन्हें 26 मार्च को आयोजित होने वाले अगले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या उन अधूरे सपनों को फिर से पूरा होने का मौका मिल पाएगा…या फिर यह मामला भी जांच के दायरे में ही सिमट कर रह जाएगा।










