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निचली अदालत में यह दलील दी गई कि ‘ऊपरी आयु’ सीमा पर विचार करते हुए तथा उम्र निर्धारण में दो साल की गड़बड़ी होने की गुंजाइश (मार्जिन ऑफ एरर) रखते हुए पीड़िता की उम्र को 20 वर्ष माना जाना चाहिए।
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निचली अदालत में यह दलील दी गई कि ‘ऊपरी आयु’ सीमा पर विचार करते हुए तथा उम्र निर्धारण में दो साल की गड़बड़ी होने की गुंजाइश (मार्जिन ऑफ एरर) रखते हुए पीड़िता की उम्र को 20 वर्ष माना जाना चाहिए।
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